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चिन्न कथा
- एक छोटी सी कहानी भगवान की ओर से
आदर्श और निरंतर सेवा
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भगवान् राम के राज्याभिषेक के कुछ दिनों के पश्चात् सीता माता और राम जी के तीनो भाईयो ने मिलकर हनुमान को रामजी की सेवा से अलग करने की योजना बनाई। वे भगवान् से जुडी विभिन्न सेवाओ की जिम्मेदारी आपस में बाँटना चाहते थे।
कारण? उन सभी का मानना था कि हनुमान को अपने प्रिय भगवान् की सेवा करने का पर्याप्त समय पहले से ही मिल चूका है। और इसलिए, उन्होंने सुबह से शाम तक की सेवाओ की एक सूची बनाई, और आपस में एक -एक कार्य को बाँट लिया।
उन्होंने हनुमान की उपस्थित में वस्तुओं और जिम्मेदारियों की सूची भगवान् को प्रस्तुत की। राम ने नई प्रक्रिया के बारे में सुना, सूची पढ़ने के बाद एक मीठी मुस्कान के साथ अपनी मंजूरी दे दी। उन्होंने हनुमान से कहा कि सभी कार्य दूसरों को सौंप दिया गया है और अब वह आराम कर सकता है। उसने जो सुना उस पर उसे विश्वास नहीं हुआ, हनुमान ने राम से प्रार्थना की कि इस सूची को एक बार उसके सामने पढ़ा जाये।
ऐसा होने के बाद हनुमान ने देखा कि 'जम्भाई आने पर ऊँगली फोड़ने (चटकना)' का कार्य छोड़ दिया गया था। उन्होंने कहा कि क्युकि राम रजा हैं इसलिए उन्हें यह स्वयम द्वारा नहीं किया जाना चाहिए,यह केवल एक सेवक द्वारा किया जाना चाहिए। ऐसा कह, वह भगवान से प्रार्थना करने लगा कि उसे यह कार्य करने दिया जाये और राम अवसर प्रदान करने पर सहमत हुए।
अपने मालिक पर निरंतर ध्यान देने कि वजह से यह हनुमान के किस्मत के लिए सबसे बड़ा हिस्सा साबित हुआ। आखिरकार, कैसे कोई यह बता सकता है कि कब जंभाई आएगी? और जब वह जम्भाई आने पर चटकाने के लिए तैयार रहेगा तो इसका अर्थ है कि हनुमान एक पल के लिए भी न दूर रह सकता है न आराम कर सकता है। अपने भगवान राम के लिए प्रेम और गंभीरतापूर्ण सेवा के कारण उन्हें इस निराशाजनक घोषणा के बाद भी सर्वश्रेष्ठ अवसर मिल गया।
वास्तव में यह सच है कि जब हम भगवान के लिए ईमानदारी से प्रेम करते हैं, बाकी सब चीजे स्वतः ही अपने जगह पर जम जाती है।
~ Baba
- साई स्मृति टीम
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