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चिन्ना कथा
- एक छोटी सी कहानी भगवान की ओर से

धर्म नियम


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प्रहलाद न केवल भगवन नारायण के भक्त थे,बल्कि एक धर्मी राजा थे । वह सभी राजाओं में उदार प्रवित्ति के थे । उन्होंने कभी किसी को न नही कहे, जो भी उनके सामर्थेय में होता वह उपहार या मदद किया करते थे ।

एक बार भगवन इन्द्र प्रहलाद की परीक्षा लेने , एक ब्राह्मण के वेश में आए । प्रहलाद ने उनका सम्मान करते हुए पूछा," क्या आप मुझे तलाश कर रहे है मै आपको कैसे खुश कर सकता हूँ" । ब्राह्मण ने उत्तर दिया,"हे राजन मै आप से उपहार में आपकी शीला (चरित्र) चाहता हूँ" ।

प्रहलाद ने कहा ठीक है ,"आपकी इच्छा पुरी हुई मै आपको अपनी शीला भेट कर रहा हूँ " । ब्राहमण दरबार से चले गए जैसे ही ब्राहमण गए एक आकर्षक व्यक्ति शाही दरबार से जाते हुए देखा गया ।

प्रहलाद ने उनसे पूछा, "श्रीमान आप कौन है?" । उस व्यक्ति ने कहा मै प्रसिद्धि हूँ," क्योकि शीला चरित्र ने तुम्हे त्याग दिया है इसलिए मै तुम्हारे साथ नही रह सकती" । प्रहलाद ने उसे जाने की आज्ञा दे दी ।

Sai Chinna Katha spacer Sai Chinna Katha

कुछ ही पल में एक और सुंदर व्यक्ति को दरबार से दूर जाते देखा गया प्रहलाद ने कहा," क्या मै जान सकता हूँ आप कौन है" । उसने कहा मै वीरता हूँ, "चरित्र और प्रसिद्धि के बिना मै तुम्हारे पास कैसे रह सकता हूँ इसलिए मै जा रहा हूँ" । प्रहलाद ने उसे भी जाने की आज्ञा दे दी ।

जल्द ही एक सुंदर स्त्री तीव्रता से दरबार से बाहर जा रही थी । प्रहलाद ने उनसे पूछा,"माँ आप कौन है", उन्होंने उत्तर दिया, "मै राज्य लक्ष्मी हूँ इस राज्य की इष्टदेव भगवान हूँ, मै यहाँ चरित्र ,प्रसिद्धि और वीरता के बिना नही रह सकती" ।

अगले ही पल एक और स्त्री आँखों में आंसू लिए आगे बढती है । प्रहलाद उनके पास भाग कर आया और पूछा," माँ आप कौन है ?" । वो कहती है, " बेटा मै धर्म हूँ जहाँ चरित्र , प्रसिद्धि, वीरता और राजलक्ष्मी तुम्हे छोड़ गए वहा मेरे लिए कोई स्थान नही है" ।

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प्रहलाद उनके चरणों में गिर पड़ा और कहा "माँ मै चारित्र, प्रसिद्धि, वीरता और राजलक्ष्मी के आभाव में जी सकता हूँ परन्तु मै आपके बिना नही जी सकता । कैसे मै आपको कही और भेज सकता हूँ । यह एक राजा का कर्तव्य होता है की वह अकेले ही पुरे संसार के आधार के लिए धर्म की रक्षा करे । कृपया मेरे साथ रहिये मुझे मत छोडिये" ।

धर्म की देवी रहने के लिए सहमत हो गई और जब यह हुआ तो सभी अन्य लोग भी दरबार में लौट आए और कहने लगे की हमारा धर्म के बिना कोई अस्तित्व नही है हमें अपने साथ रखने की कृपा करें ।

भगवान इन्द्र ने दुनिया के लिए प्रहलाद की महानता जिसने धर्म के सिद्धांत का सदा पालन किया उदाहरण देकर स्पष्ट किए ।

- Baba


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