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September 22, 2009 - दशहरा यज्ञं की शुरुआत

ओणम समारोह के दूसरे दिन की शानदार शुरुआत भगवान के प्रात: 8:30 सुन्दरतापूर्वक आगमन से हुआ जब वे प्रभावशाली तरीके से कुर्सी पर बैठे हुए आये। केरलवासिओं के लिए भगवान ने यह विशेष आनंद का अवसर प्रदान किया जिसका अन्य लोगो ने भी आनंद उठाया। जब स्वामी दर्शन लाइनों में आगे बढ रहे थे तब वेद पाठ हो रहा था।

उन्होंने कई लोगो से बात की, पुरुष दीर्घा में बैठे उड़ीसा सेवादल जिन्होंने अपनी सेवा पूरी की थी के पास काफी समय उन्होंने बिताया। केरल के छात्रों को जो विश्वविद्यालय में पढ़ रहे है दर्शन के लिए आए थे उन सब को स्वामी ने आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कई कार्ड तथा उनके द्वारा बनाया हुआ एक छोटा सा वीडियो प्रस्तुति भी उन्होंने देखा जिसे वे एक लैपटॉप लाये थे !



पूरा राउंड लेने के बाद स्वामी मंच पर आये फिर वेदोच्चारण शुरू हुआ। उन्होंने उडीसा सेवादल के कई लोगो बातचीत की। उनकी संख्या 900 थी और स्वामी उनकी जानकारी से काफी खुश थे। स्वामी इंटरविव रूम में जाने से पहले वेदोच्चारण के लिए बैठे रहे। भजन शुरू हुआ और हमेशा की तरह आरती के साथ संपन्न हुआ।

शाम को दो कार्यक्रम निर्धारित थे। पहला श्री सत्य साई विद्यापीठ, श्रीसैलम के छात्रों द्वारा एक नाटक का मंचन। दूसरा विख्यात सुश्री चित्रा द्वारा एक संगीत समारोह की प्रस्तुति। 4:50 बजे स्वामी दर्शन के लिए पहुंचे। वह दर्शन राउंड में हॉल के केंद्र तक चले गए और फिर एक चक्कर लेने का फैसला किया। इसके बाद वह मंच पर आए और कार्यक्रम शुरू करने को कहा। नाटक का नाम "भक्त तुकाराम" था। बच्चों ने स्वामी से अनुमति मांगी और भगवान के आशीर्वाद के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ।

इस नाटक चित्रण था तुकाराम की पंढरपुर के भगवान विठ्ठाल में आस्था और भक्ति की। संत ने भक्तिपूर्ण जीवन जीया भगवान विठ्ठाल के प्रशंसा में गीत गाया और सांसारिक जीवन और जिम्मेदारी से अनजान रहे। उनके जीवन से पता चलता है कि अगर भगवान में विश्वास हो तो चाहे कितना मुश्किल परिस्थिती हो जीवन की नाव वो पार लगा देते हैं।

चाहे वह घर में भूखे पेटों को पालना हो या फिर जंगल में पैसो का खो जाना तुकाराम का हमेशा भगवान पर भरोसा दृढ़प्रतिज्ञ था। यह वही विश्वास था जिसके कारण अंततः सभी कठिनाइयों के बावजूद उनकी पत्नी का ह्रदय जीतकर ईश्वर में विश्वास पैदा कर गया।

जब नाटक पूरा हुआ तब स्वामी ने छात्रों की ओर देखकर उन्हें संगीत का कार्यक्रम शुरू करने को कहा। जब माइक लग गए और छात्र तैयार हो गए तब राज्य के अध्यक्ष ने स्वामी से अनुरोध किया कि क्या सुश्री चित्रा अपनी प्रस्तुति दे।

स्वामी ने सहमती देते हुए उनका मंच पर स्वागत किया। यह देखना काफी दिलचस्प था कि यह दिग्गज गायत्री स्वामी को सौम्य मुस्कान के साथ बैठे देखकर मंच पर इतना घबरा रही थी। स्वामी ने उन्हें और साथी कलाकारों को आशीर्वाद दिया और उन्हें कार्यक्रम शुरू करने को कहा। गणेश वंदना के साथ शुरू करके उन्होंने दस गाने गए जिसमे एक भजन भी शामिल थी, और यह एक सुरीला मिश्रण था जो कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से बना था इसने उनके दुर्लभ प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया।

इसमे शामिल गीत हैं, मधुर मुखडा साई नाथ, भावयामि गोपाल बालम, जय जय जय जय साई जननी, आलारे गिरिधर गोपाल, पशुपथी थनया विघ्न विनाशाका, कृष्णा नी बेगाने बारो, कोई कहियो रे प्रभु अवन साथ ही लोकप्रिय प्रशांति भजन चित्ता चोरा यसोदा के बाल, नवनीता चोरा गोपाल


Tuesday, Sept 01, 2009 ओणम समारोह, द्वितीय दिन , संत तुकाराम पर नाटक का मंचन

ओणम समारोह के दूसरे दिन की शानदार शुरुआत भगवान के प्रात: 8:30 सुन्दरतापूर्वक आगमन से हुआ जब वे प्रभावशाली तरीके से कुर्सी पर बैठे हुए आये। केरलवासिओं के लिए भगवान ने यह विशेष आनंद का अवसर प्रदान किया जिसका अन्य लोगो ने भी आनंद उठाया। जब स्वामी दर्शन लाइनों में आगे बढ रहे थे तब वेद पाठ हो रहा था।

उन्होंने कई लोगो से बात की, पुरुष दीर्घा में बैठे उड़ीसा सेवादल जिन्होंने अपनी सेवा पूरी की थी के पास काफी समय उन्होंने बिताया। केरल के छात्रों को जो विश्वविद्यालय में पढ़ रहे है दर्शन के लिए आए थे उन सब को स्वामी ने आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कई कार्ड तथा उनके द्वारा बनाया हुआ एक छोटा सा वीडियो प्रस्तुति भी उन्होंने देखा जिसे वे एक लैपटॉप लाये थे !



पूरा राउंड लेने के बाद स्वामी मंच पर आये फिर वेदोच्चारण शुरू हुआ। उन्होंने उडीसा सेवादल के कई लोगो बातचीत की। उनकी संख्या 900 थी और स्वामी उनकी जानकारी से काफी खुश थे। स्वामी इंटरविव रूम में जाने से पहले वेदोच्चारण के लिए बैठे रहे। भजन शुरू हुआ और हमेशा की तरह आरती के साथ संपन्न हुआ।

शाम को दो कार्यक्रम निर्धारित थे। पहला श्री सत्य साई विद्यापीठ, श्रीसैलम के छात्रों द्वारा एक नाटक का मंचन। दूसरा विख्यात सुश्री चित्रा द्वारा एक संगीत समारोह की प्रस्तुति। 4:50 बजे स्वामी दर्शन के लिए पहुंचे। वह दर्शन राउंड में हॉल के केंद्र तक चले गए और फिर एक चक्कर लेने का फैसला किया। इसके बाद वह मंच पर आए और कार्यक्रम शुरू करने को कहा। नाटक का नाम "भक्त तुकाराम" था। बच्चों ने स्वामी से अनुमति मांगी और भगवान के आशीर्वाद के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ।

इस नाटक चित्रण था तुकाराम की पंढरपुर के भगवान विठ्ठाल में आस्था और भक्ति की। संत ने भक्तिपूर्ण जीवन जीया भगवान विठ्ठाल के प्रशंसा में गीत गाया और सांसारिक जीवन और जिम्मेदारी से अनजान रहे। उनके जीवन से पता चलता है कि अगर भगवान में विश्वास हो तो चाहे कितना मुश्किल परिस्थिती हो जीवन की नाव वो पार लगा देते हैं।

चाहे वह घर में भूखे पेटों को पालना हो या फिर जंगल में पैसो का खो जाना तुकाराम का हमेशा भगवान पर भरोसा दृढ़प्रतिज्ञ था। यह वही विश्वास था जिसके कारण अंततः सभी कठिनाइयों के बावजूद उनकी पत्नी का ह्रदय जीतकर ईश्वर में विश्वास पैदा कर गया।

जब नाटक पूरा हुआ तब स्वामी ने छात्रों की ओर देखकर उन्हें संगीत का कार्यक्रम शुरू करने को कहा। जब माइक लग गए और छात्र तैयार हो गए तब राज्य के अध्यक्ष ने स्वामी से अनुरोध किया कि क्या सुश्री चित्रा अपनी प्रस्तुति दे।

स्वामी ने सहमती देते हुए उनका मंच पर स्वागत किया। यह देखना काफी दिलचस्प था कि यह दिग्गज गायत्री स्वामी को सौम्य मुस्कान के साथ बैठे देखकर मंच पर इतना घबरा रही थी। स्वामी ने उन्हें और साथी कलाकारों को आशीर्वाद दिया और उन्हें कार्यक्रम शुरू करने को कहा। गणेश वंदना के साथ शुरू करके उन्होंने दस गाने गए जिसमे एक भजन भी शामिल थी, और यह एक सुरीला मिश्रण था जो कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से बना था इसने उनके दुर्लभ प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया।

इसमे शामिल गीत हैं, मधुर मुखडा साई नाथ, भावयामि गोपाल बालम, जय जय जय जय साई जननी, आलारे गिरिधर गोपाल, पशुपथी थनया विघ्न विनाशाका, कृष्णा नी बेगाने बारो, कोई कहियो रे प्रभु अवन साथ ही लोकप्रिय प्रशांति भजन चित्ता चोरा यसोदा के बाल, नवनीता चोरा गोपाल












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