यह कोई दोपहर 11:10 का समय था जब टाटा संस के अध्यक्ष श्री रतन टाटा पुट्टपर्ती में श्री सत्य साई हवाई अड्डे पर उतरे।
उनका गर्मजोशी के साथ स्पेशल गेस्ट ऑफ़ ओनर से स्वागत किया गया। आश्रम में विभिन्न संस्थाओं - सुपर स्पेसिलिटी हॉस्पिटल, विश्व विद्यालय का प्रशासनिक ब्लॉक, प्रशांति निलयम परिसर, इंडोर स्टेडियम और चैतन्य ज्योति संग्रहालय में एक त्वरित दौरे के दौरान उन्हें विस्तार से भगवान द्वारा निर्धारित लक्ष्य को समझाया गया।
शाम के लिए, अपने प्रिय स्वामी के सामने प्रस्थति देने के लिए विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक नाटक तैयार किया था। अंतिम क्षण में भगवान् ने कार्यक्रम स्थल साई कुलवंत हॉल से ऑडिटोरियम सभागार में बदल दिया।
शाम में, स्वामी ने सन्देश भेजा कि सभी छात्रों को श्री टाटा के साथ कॉलेज के सभागार में ही बिठाया जाये वे सीधे वहां पहुंच जाएंगे।
सभी सभागार में स्वामी के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। जल्द ही, स्वामी पहुंचे और उनका स्वागत किया गया। श्री टाटा ने स्वामी को अपना सम्मान प्रकट किया और स्वामी के अपने जगह में बैठने के साथ ड्रामा शुरू किया गया।
इस बैचेनी में अभिनेता दल में से कुछ सदस्य मेकप से तैयार नहीं हो पाए थे! जब स्वामी ने दुबारा शुरू करने के लिए कहा तब उन्हें इस परिस्थिति के बारे में बताया गया तब शांति से स्वामी ने भजन के लिए कहा और जल्द ही "प्रेम ईश्वर है" से सारा वातावरण महक उठा।
भजन के बाद मुख्य कलाकार नीचे मंच पर आये और स्वामी को कार्ड और फूल दिए, उनसे आशीर्वाद लेने के पश्चात् नाटक शुरू किया गया।
इस नाटक कि शुरुआत एक युवा से हुआ जो अपने दादा से एक शीर्ष विदेश विश्वविद्यालय में पूरा छात्रवृत्ति के साथ प्रवेश पाने पर अपनी खुशी व्यक्त कर रहा है।
उसके दादा भी उसे बधाई देते हुए कहते हैं कि उन्हें भी पढाई पूरी करने के बाद एक अच्छी कंपनी में कम करने का प्रस्ताव मिला था। दादा अपने फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए बताते हैं कि उनकी इच्छा "भारत" कि सेवा करने कि थी।
नायक अब दुविधा में पड़ जाता है, और रबिन्द्रनाथ टैगोर ने अपने महाकाव्य में जिस आजाद स्वर्ग भूमि कि कल्पना कि थी उसे देखना चाहता है।
उसे दुविधा में मार्गदर्शित करते हुए भारत कि भावना कि चमक आदर्श के रूप में चमकती है और उसे इस गौरवशाली राष्ट्र के कई सपूतो के बारे में बताते हैं जिन्होंने अच्छा नाम कमाया है। इसके बाद वे स्वामी विवेकानंद, युधिष्ठिर, आदि शंकराचार्य और वृंदावन के गोपिका के जीवन में जो सत्य, धर्म, शांति और प्रेमा के महान मूल्यों के प्रतीक बन गए उदाहरणों से बताते हैं।
स्वामी विवेकानंद, कई वित्तीय समस्याओं से घिरे होने पर भी हर बार माँ काली के प्रकट होने पर उनसे पुच्छती कि वह क्या चाहते हैं लेकिन वे हमेशा आध्यात्मिक आशीर्वाद ही मांगते। "मैं माँ से भक्ति और विश्वास के अलावा और कुछ कैसे मांग सकता हूँ?" उनके इस जवाब पर जब एक बार उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस ने उनसे पुच्छा कि वे भोजन, आवास और संपत्ति क्यों नहीं मांग लेते! युधिस्ठिर धर्म के प्रतीक के रूप में थे क्युकी उन्होंने अपने अन्य भाई जो ज्यादा प्रतिभाशाली और वीर थे के बावजूद "नकुल" जो दूसरे माँ, मदिरी जो ज़िंदा थी के लिए जीवन को चुना!
आदि शंकर, अद्वैता की अवधारणा को मूर्तरूप दिया लेकिन उन्हें भी माया से विनती करनी पड़ी जब वह एक "चंडाल" को अपने रास्ते से हटाना पड़ा। वह "चंडाल", वास्तव में भगवान शिव थे, उन्होंने शंकरा का मार्गदर्शन करके उन्हें सही रास्ते पर लाया। अंत में, वृंदावन कि एक सामान्य चरवाहे कि लड़की ने दिखाया कैसे भगवान् को सिर्फ प्रेम से जीता जा सकता है। "भारत" की आत्मा ने अंततः बताया कि इस शिक्षा का सार परमेश्वर से प्रेम करना है और कहा:
विचारो में प्रेम सत्य,।
कर्म में प्रेम सही आचरण,
समझ में प्रेम शांति,
स्वामी नाटक के प्रदर्शन के दौरान ही वहां पहुच गए। हालांकि, काफी अंधेरा था, कोई भी देख सकता था कि श्री टाटा प्रस्तुति से काफी प्रेरित थे। जैसे ही नाटक का समापन हुआ, स्वामी ने मंच पर विद्यार्थियों के साथ फोटो खिंचवाए।
फोटो खिंचवाने के बाद स्वामी ने मंच से ही श्री टाटा से बात करना शुरू कर दिया। उन्होंने एक छात्र के माध्यम से कहा, "ये छात्र यहाँ पीएचडी कर रहे हैं। ये एम. टेक, एम एस सी और एमबीए में स्नातक कर रहे हैं। " जब यह लगा कि स्वामी और टाटा एक दूसरे के साथ अधिक संवाद कर रहे हैं, तब स्वामी ने उन्हें भी मंच पर बुलाया।
एक कुर्सी श्री टाटा के लिए स्वामी के पास रखी गई और इससे पता चलता है वास्तव में रतन टाटा जी ने अद्भुत जीवन जी है जो उन्हें स्वामी से ऐसा आशीर्वाद मिला है। भगवान ने उनसे कई कलाकारों का परिचय देना शुरू किया। जाहिरा तौर पर वे छात्रो के बहुमुखी प्रतिभा से जो विभिन्न पाठ्यक्रमों से थे से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके।
स्वामी ने पहली लाइन से हार्ड रॉक कैफे से प्रसिद्धि श्री इस्साक टीग्रेत्त को बुलाया। उनसे पूछा, 'कितने होटल हैं? " श्री तिग्रेत्त ने कहा, "स्वामी, 148 से अधिक हार्ड रॉक कैफे हैं। लेकिन यह सब मेरे मास्टर(प्रभु) के सामने कुछ नहीं है! मास्टर (प्रभु) ही सब कुछ है। " तब स्वामी ने कहा कि "उसकी बेटी भी यहाँ आकर बसना चाहती है। इस देश में आज समस्या यह है कि युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। विदेशी में माता पिता भी सही रास्ते पर नहीं हैं। "
इन सबसे अलग उन्होंने एक घोषणा की, "सब कुछ प्रदूषित है। मेरे छात्र सब जगह जायेंगे और सब कुछ साफ करेंगे। उनके लिए यही मेरी सेवा है। " स्वामी ने मंच पर उप्श्थित सबसे बातचीत जारी रखा। उन्होंने एक छात्र से पूछा कि वह अपनी पीएचडी के बारे में बताये और पाया कि वह हृदय की समस्याओं की रोकथाम के बारे में थी, और कहा, "दिल की सभी समस्याओं का कारण खान पान के कारण होती है - बुरी आदतें, बुरे विचार और प्रदूषित पर्यावरण के कारण हृदय रोग होते हैं। "
गीतों के बारे में बोलते हुए स्वामी ने कहा कि भावनाओं का, लय और संगीत के सद्भाव सबसे महत्वपूर्ण हैं। "भाव, राग और ताल - इनसे भारत बना है। भाव या भावनाओं का गठन सबसे महत्वपूर्ण है। यहाँ रह रहे लड़कों के अन्दर बहुर सारी भावनाये हैं। वे गांवों में जाकर गरीब लोगो की सेवा करते हैं। " इस पर श्री टाटा ने कहा, "मैंने इनकी आंखों और चेहरे में चमक देख लिया है। उनमे आपके लिए बहुत भक्ति है"। स्वामी ने कहा, "अगर सभी में इस तरह की भक्ति होगी, दुनिया में तत्काल सुधार होगा। " स्वामी ने एक छात्र से पूछा जो कृष्ण के रूप में काम किया था, "तुम्हारी पत्नी कौन है?" उसने कहा, "स्वामी, इस ड्रामा में सत्यभामा। " स्वामी ने चुटकी ली, "मैंने ड्रामा के बारे में ही पूछा था! सब कुछ ड्रामा है। यह भी एक ड्रामा है। "
सभी में एक साथ कहा "और आप दिव्य निर्देशक है, स्वामी!" स्वामी भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को घडी उपहार स्वरूप दी। उन्होंने पद्नामस्कर दिया और लडको से पुच्छा वे क्या चाहते हैं। सभी छात्रो ने कहा स्वामी और सिर्फ स्वामी। स्वामी ने फिर वार्डन को बुलाया और कहा " ये हमारे छात्र हैं। अब ये भौतिकी देखते हैं और वार्डन भी हैं। बताओ तुमने किस विषय में पीएचडी की है...." वार्डन ने कहा "स्वामी ने सब कुछ दिया है,वो सब जानते हैं। हमने कुछ भी नहीं किया है। " ।
स्वामी ने गायकों को बाहर बुलाया और भाई रवि कुमार की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "यह लड़का यहाँ प्राथमिक स्कूल से अध्ययन कर रहा है। क्या काम कर रहे हो आप?" उसने कहा है कि वह SSSIHMS में प्रबंधक था। स्वामी ने कहा कि वह 16 साल से यहाँ कार्य कर रहा है। अन्य गायकों से भी बात की गई और स्वामी ने उनमें से प्रत्येक को कुछ गीत और भजन का अंश गाने को कहा। यह मंच पर एक अद्भुत सत्र था। स्वामी ने पुष्टि की है कि सभी नाटक में "महिलाओं" को उपहार मिला था। यह सुनिश्चित करने के बाद कि सभी खुश हैं, स्वामी 6:45 पर बाहर निकले, श्री टाटा को स्वामी की गाड़ी में बैठने का विशेषाधिकार मिला जब उन्हें स्वामी ने अन्दर बुलाया।
मंदिर पहुचने पर स्वामी भजन कक्ष में चले गए और श्री टाटा को भी वहां बुलाया। एक खूबसूरत निजी सत्र में स्वामी ने श्री टाटा के बारे में कहा कि "वे एक अच्छे इंसान हैं। उनके कोई पत्नी और बच्चे नहीं है और इसलिए वह सभी को अपने बच्चों के रूप में देखते है। उन्होंने समाज सेवा के लिए बहुत किया है। " भजन हॉल में उन्होंने आरती लिया - नए और पुराने सभी छात्र जिन्हें आज स्वामी को गुलाब देने का मौका मिला था उन्हें स्वामी ने स्पर्शन और संभाषण (छोकर आशीर्वाद देना) के साथ आशीर्वाद दिया। उन्होंने श्री टाटा को वादा किया है कि वह उन्हें अगले ही दिन एक इंटरविव देंगे, स्वामी ने प्रस्थान किया।
रात्रि में, श्री टाटा ने स्वामी द्वारा लिए गए परियोजनाओं के वीडियो - विशेष रूप से जल परियोजना देखा। वह बहुत प्रभावित हुआ और व्यक्त किया कि, "मुझे जल परियोजना का हिस्सा बनाने में बहुत हर्ष होगा। यह एक परियोजना, जहाँ यह वास्तव में जरूरतमंद लोगो तक इसका लाभ पंहुचेगा- गरीब आदमी तक! काश मैं वहां गया होता और स्वामी की परियोजना को देखने और पूरा कर पता! " श्री टाटा वास्तव में लाखों लोगों की तरह एक और थे जो कहते है "मैं आया, मैंने देखा और मैंने विजय प्राप्त की (उनके प्यार से)। "