प्रशांति निलयम में शिवरात्रि का अपना विशेष महत्त्व है खासतौर पर भगवान् के भौतिक शरीर के दर्शन करना। भगवान् श्री सत्य साई बाबा के भक्त उन्हें शिव-शक्ति का रूप मानते हैं इसलिए इसमे कोई आश्चर्य की बात नहीं की हजारो की संख्या में भक्त शिवरात्रि के उपलक्ष्य में प्रशांति निलयम आते हैं।
दिन भर का इंतजार तब समाप्त हुआ जब भगवान् मेहरून रंग के वस्त्र धारण किये हुए पूर्णचंद्र सभागार में आये जहाँ हजारो की संख्या में लोग दर्शन के लिए बैठे थे। साई कुलवंत हॉल की ओर जाने पर स्वामी का स्वागत "नादस्वरम" और "पंच्वाद्यम" से किया गया जहाँ विद्यार्थियों द्वारा वेदोच्चारण भी किया जा रहा था। पूरा चक्कर लेने के बाद स्वामी ने विशेष रूप से इटालियन केक मेकर द्वारा बनाये गए केक काटा।
दिन और रात में मध्य शिवरात्रि के उपलक्ष्य पर, "नटराज" ने लोगो के मन में नृत्य करने का विचार बनाया जो उनके छात्रो के द्वारा गए जा रहे मधुर गीत सुन रहे थे। 5.45 से लगभग 1 घंटे चले लिंग्स्त्कम के दौरान प्रतिभाशाली छात्रो ने कनिर्क, हिन्दुस्तानी तेलुगु हिंदी में भगवान् के गुणगान वाले गीत सुनाये जान श्रोतागण साई कुलवंत हॉल में क्षमता से अधिक बैठे थे।
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स्वयं सत्यम भगवान् के समक्ष जब गीत "महाअपर्ण दीपम" गया गया तब हजारो लोगो के उर्जा स्तर और भी बढ़ गया। "ॐ नमः शिवाय" बीच-बीच में गूंज रहा था। भगवान् ने दो गायकों को मच पर "थिल्लाना" गाने को कहा।
अखंड भजन 6.45 को शुरू हुआ। महिला और पुरुष वर्ग एक के बाद एक गाते रहे। भगवान् 8 बजे यजुर मंदिर को प्रस्थान किये। भगवान् के कहने पर आरती दी गई लेकिन बिना शांति मात्र उच्चारण के भजन चलता रहा।
रात्रि में साई कुलवंत हॉल आध्यात्मिक कम्पन उत्सर्जित कर रहा था। 2006 में अति रूद्र महायज्ञ के दौरान विशेष आकर्षण का केंद्र रहे "साईश्वारा लिंगम" को मध्यम में स्थापित किया गया था।
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सुबह 6.05 बजे भगवान् आये। भगवान् ने बरामदे और भजन हॉल के कई चक्कर लिए। इस बीच विशेष प्रशाद दिया गया।
7.10 को आरती देने के पश्चात चावल और मीठे पुडी का प्रसाद बांटा गया। 8 बजे भगवान् के यजुर मंदिर प्रस्थान के साथ ही 2010 का मशिव्रात्रि पर्व का समापन हुआ।