Feb 2010 BEACON OF LOVE - Times of India Supplement - March 2010
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Srimad Bhagavata Saptaaham - Inaugural Session March 17, 2010

इस सुबह , भगवान हॉल में 9:27 पर वेदमंत्र के साथ आये। एक सप्ताह चलने वाले भागवत सप्ताह यजनं के उद्घाटन दिन होने के नाते, वेद आज 9 के बाद भी जारी रहा। दर्शन राउंड पूरा करने के बाद भगवान कुछ देर इंटर-विव रूम के बाहर बिताने के बाद 9:35 पर गणेशा के दाये से मंच पर आये।
मंच पर आने के बाद, भगवान ने औपचारिक रूप से सप्ताह यजनं का दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन किया। पंडित, श्री रितु राज जी महाराज और उनके साथियों ने यज्ञ प्रराम्ह करने से पहले भगवान से आशीर्वाद लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत 9:40 पर "साईश्वाराया विध्महे ..." प्रार्थना जो भगवान को संबोधित था के साथ हुआ। महाराज ने अपने व्यक्तव्य की शुरुआत भागवत पर एक परिचय से किया, महाराज ने इस महाकाव्य का श्री भगवान् को दिया जो इसकी स्त्रोत हैं।
महाराज जी ने भगवान के लिए भावनात्मक शब्दों में आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, कहीं किसी समय मैंने आने और दिव्य दर्शन करने का वरदान माँगा था और भगवान् ने मुझे यह महान भव्य अवसर प्रदान किया है, यह कई जन्मो का परिणाम है ..........
इस शाम, भगवान 5:35 पर आये जब भागवत सप्ताह चल रहा था। दर्शन का एक पूरा दौर पूर्ण करके भगवान 5:47 पर गणेश के दायीं ओर से मंच पर आए। पंडित जी ने भागवत कथा पर अपनी व्याख्या जारी रखते हुए राजा परीक्षित की कथा सुनाई। 6:04 पर व्याख्यान समाप्त होने पर भजन शुरू हुआ, शुरुआत भगवान् के विशेष आव्हान पर आलाप "श्री राघवम ..." से हुआ। भजन 6:40 तक जारी रहा, जब भगवान ने एक और आलाप भजन के लिए कहा, इस बार "अल्लाहो अकबर ..." से वातावरण गूंज उठा जो धार्मिक सद्भाव का प्रतिक है। दो और भजन के बाद भगवान को 6:50 पर आरती दी गयी। आरती के बाद भगवान अगले दस मिनट तक मंच पर और रुके, भजन गायकों से बात करके के बाद 7:05 पर यजुर मन्दिर को बढ़ गए, सभी में प्रसाद वितरण किया गया।


Ugadi Celebration March 16, 2010



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उगादी में शुभ सुबह पर, साई कुलवंत हॉल को सरलता पूर्वक शानदार सजावट दी गई, यह तेलुगु नव वर्ष के आगमन को दर्शा रहा था। भगवान हॉल में 9:36 में आये जब भजन चल रहा था। भगवान् मेहरून रंग पहने, अपनी विशेष "सिंहासन कुर्सी" में आये जो वो कभी कभी ही उपयोग में लाते हैं। लोगो की जमावड़े के बीच से होते हुए, बरामदे में भगवान् 9:45 को आये, भगवान् सीधे इंटरविव में चले गए जहाँ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री पी.एन. भगवती के साथ एक छोटा सत्र था।
सुबह के कार्यक्रम की शुरुआत भगवान के 10:10 पर मंच पर आने के साथ शुरू हुआ। वी. श्रीनिवासन, अध्यक्ष , श्री सत्य साई सेवा संगठन - भारत, ने इस अवसर प्रारंभ किया और पहले वक्ता श्री भगवती को श्री सत्य साई सेंट्रल ट्रस्ट के बारे में जानकारी देने हुए आमंत्रित किया।
श्री भगवती का भाषण श्री सत्य साई सेंट्रल ट्रस्ट के नए न्यासी और परिषद के सदस्यों के बारे में था। आगे का विषय श्री सत्य साई सेंट्रल ट्रस्ट को सबसे बड़े चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर मानवता के लाभ के लिए स्थापित करने पर था। ट्रस्ट के खिलाफ दुष्प्रचार और ग़लतफ़हमी पर बोलते हुए श्री भगवती ने भगवान के मिशन मानवता के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा, वे प्रेम से भरे हुए सारी सीमाओ से परे हैं।
इसे श्री इन्दुलाल शाह ने अपने छोटे से भाषण में आगे बढाया, उन्होंने जस्टिस भगवती के प्रस्ताव के समर्थन करते हुए कहा कि उनके पास ट्रस्ट और संगठन के बारे में बोलने के लिए कोई शब्द नहीं है क्युकि वो अभिभूत महसूस कर रहे हैं।
दोनों दिग्गज भक्त मंच पर भगवान के दोनों ओर बैठे थे।
आगे श्री वी. श्रीनिवासन ने एक संक्षिप्त भाषण जो भगवान, उनके मिशन तथा उनके मिशन का एक हिस्सा होने के अधिक महत्व के बारे में थी। ट्रस्ट के विरोध में दुष्प्रचार पर उन्होंने कहा कि श्री सत्य साई सेंट्रल ट्रस्ट पारिवारिक ट्रस्ट नहीं है, बल्कि दुनिया में सबसे बड़ी चैरिटेबल ट्रस्ट है।
उगादि दिव्य प्रवचन, जो कि चालीस मिनट तक चली के साथ इन्तेजार ख़त्म हुआ। महान भारतीय महिलाओ सावित्री, चंद्रमती, माँ सीता और दमयंती से शुरुआत कर भगवान् ने हरिश्चंद्र की कहानी तक विस्तार किया और बताया कि कैसे भगवान् ने हरिश्चंद्र की प्रतिबद्धता और सत्य के पालन पर उनपर कृपा की। मनुष्य को यह बात समझनी होगी की भगवान् सब जगह हैं। उगादि नए साल की शुरुआत को बताता है। आज इस नव वर्ष के दिन भगवान् ने आह्वान किया कि मनुष्य को जो भी उनके सामने आये उसमे ईश्वर को देखने का प्रयास करना चाहिए। अपनी दिव्य प्रवचन के अंत की ओर बढ़ते हुए भगवान ने एक कॉलेज छात्र के साथ बातचीत की। अपनी बातचीत के दौरान पन्ने की एक अंगूठी सृजित की और उस लड़के को दी। 11:20 पर दिव्य प्रवचन की समाप्ति हुई, जिस पर प्रो अनिल कुमार ने एक पवित्र तेलुगु वाक्यों से पूर्ण काव्य जो साई महात्म्यं पर था का वर्णन किया। 11:45 पर भगवान् को आरती दी गई और 11:50 पर यजुर मंदिर को प्रस्थान किये।
सभी लोगो को प्रसाद वितरित किया गया और डॉ. पवन सारा द्वारा लिखित एक छोटी सी पुस्तिका "ऊरू लेतु - पेरू लेतु " जिसका अर्थ "न देश- न नाम" को छात्रो में वितरित किया गया। मंच जाने से पहले अनिल कुमार के भाषण के बाद भगवान ने छात्रों द्वारा लाये गए विभिन्न उत्सव प्रतीक आइटम को आशीर्वाद दिया।
शाम के समय भगवान् ५.३० बजे वेदोच्चारण के मध्य आये। महरून रंग के वस्त्र में भगवान् मध्य मार्ग से चक्कर लेते हुए बरामदा की बढ़ते हुए महिलाओ की ओर गए जो उनका सामान्यत लौटने का मार्ग है, 5:45 को वे वापस बरामदे की ओर लौटे। संगीत कॉलेज का समूह, स्टाफ और छात्र अपनी भेंट के साथ 5:50 पर शुरू करने की आदेश के साथ तैयार था। मुख और वाद्य के जादू से मंत्रमुग्ध करने की क्षमता वाकी यह संग्रह शाम को प्रदर्शित किया गया। 7 बजे कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भगवान नीचे मंच से उतारकर ग्रुप फोटो सत्र के लिए आये। साथ ही सभी में, सफारी के कपडे वितरित किए गए.7:15 पर आरती लेने से पहले संगीत कॉलेज से संबंधित विभिन्न उपकरणों को भगवान द्वारा आशीर्वाद दिया गया।

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March 15, 2010

इस सुबह, यहाँ कोई दिव्य दर्शन नहीं हुआ और 9:40 पर आरती दी गयी। कल शाम को भगवान् के चाहे अनुसार संगीत कॉलेज मंडली एक संगीत कार्यक्रम के साथ तैयार थी। 8-9 बजे तक चलने वाले नियमित वेद-जप, उसके बाद भजन फिर आरती दी गयी। भजन की शुरुआत 9 बजे भजन "प्रथम वंदना गणनाथ ..." से शुरू हुआ जो फिछले कुछ समय से एक नए भजन के रूप में शुरू की गई है।
उगादी की पूर्वसंध्या पर श्री सत्य साई सेवा संगठन के तत्वावधान में आन्ध्र प्रदेश से आये सत्तर लोगो के दल ने जिसमे 40 पुरुष और 30 महिलाये,शामिल थी, भगवान् का इंतजार कर रही थी। वो साथ में गीतों की बहार लेले आये थे। वेद और नाद्श्वरम के मध्य जो 5 बजे से चल रहा था, भगवान् 6:16 पर अपनी कार में आए। बरामदे का एक चक्कर लेते हुए 6:18 पर भगवान् केंद्र पर आये। उतरने पर 6:20 को भगवान मंच की ओर विशाल भीड़ की ओर प्रेम दृष्टी से आशीर्वाद देते हुए आये। जल्द ही जन्मदिन का आशीर्वाद लेने लडको का एक समूह एक बाद एक उनकी ओर बढ़ा।
इसके बाद पुरुषों और महिलाओं के म्यूजिक ग्रुप ने लाइन में खड़े होकर कार्यक्रम के पहले उनसे आशीर्वाद माँगा। 6:30 बजे कार्यक्रम शुरू होकर 7:25 तक चला। दस गीत जो तेलुगु में थे और टिप्पणी से भरे हुए थे से पूरा साई कुलवंत संगीतमय हो गया। उन्हें प्रत्येक गीत साई के प्रति समर्पण, प्यार और भक्ति की नई ऊंचाइयों पर ले जाते गया।
समाप्ति पर पूरे समूह में सफारी और साड़ियाँ बांटी गई और बाद में भगवान् निचे उतर कर समूह के साथ एक ग्रुप-फोटो खिंचवाए। मंच की जाते हुए भगवान में महिला गायकों की समूह की ओर मुह करके बैठने के निश्चय किया। 7:40 पर आरती लेने के पश्चात् भगवान 7:45 को यजुर मंदिर की ओर प्रस्थान किये।


March 14, 2010

भगवान् 9.34 को हॉल में प्रवेश किये जब भजन चल रहा था। सात मिनट के लम्बे दर्शन के फेरे लगाने के बाद 9.41 को भगवान् बरामदे में आये। इससे ठीक पहले भगवान् प्राथमिक स्कूल ब्लॉक में कुछ प्राथमिक बच्चों से मिले और उन्हें आशीर्वाद दिया। निचले बरामदे में विश्वविद्यालय ब्लॉक की ओर चलते हुए गणेशा के दाये ओर मंच पर 9.44 को भगवान् और 10.12 बजे तक भजन सत्र तक बैठे। आरती के बाद मंच पर भगवान् कुछ छात्रो से मिले और बाद में 10.21 बजे यजुर मंदिर जाने से पहले प्राथमिक शाला के बच्चो को प्रसाद बांटा गया। रविवार होने के कारण सुबह के दर्शन में छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थे।


March 7, 2010
Gratitude Programme by Final UG - Final PG combine..

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