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Nov 01, 2009 - संध्या कालीन दर्शन
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Nov 01, 2009 - भगवान् जम्बूरी मैदान, वोरली में
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Oct 31, 2009 - जब सोनू निगम ने दिव्य अवतार के लिए गीत गाया
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मुंबई एक शहर है जो कि हमेशा चलती रहती है। लेकिन आज उसके चल में संगीत थी और उसके दिल में एक गीत। और क्यों नहीं, आज उसके प्रिय भगवान श्री सत्य साई बाबा उसे एक दिव्य यात्रा जो दे रहे थे वो भी नौ सालो के बाद!
दो-ढाई हफ्ते पहले, जब 'गोपी और गोपिकाओ' ने अपने भगवान कृष्ण की वापसी के बारे में सुना, उनके कदम नाच उठे और बड़ी मेहनत से उनके आराम से रहने के लिए तैयारी करना शुरू कर दिया।
अपने वादे के अनुसार ब्रह्मांड के स्वामी हडशी की नीली-हरी पहाड़ियों से उतरकर मुंबई की सूखी मिट्टी को पवित्र किया।
सबसे पहले उन्होंने अपने निवास, धर्मक्षेत्र का रूख किया। जहां उनके भक्तों ने अपनी भक्ति को आत्मा छू लेने वाले भजनों द्वारा व्यक्त किया और स्वामी से उनके दया और मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना किया।
शाम में, लगभग पचास हजार श्रद्धालु गोरेगांव NSE मैदान में एकत्र हुए। लगभग 60,000 से अधिक लोगो से भरा हॉल भगवन की स्तुति और महिमा की मधुरता से गूंज उठी।
बाबा लगभग 6:30 पर आये, उनका स्वागत वेदोंच्चरण से किया गया। जिसके शक्तिशाली कंपन से मैदान में उपस्थित सभी हिल पड़े। बाबा खूबसूरती से सजाये गए मंच के ऊपर बैठे, और प्यार से सामने पंक्तियों में बैठे अपने बच्चों को देखने लगे और उन सभी को जो दूर थे को खोजने लगे।
इसके तुरंत बाद प्रसिद्ध गायक सोनू निगम अपने परिवार के साथ भगवान से आशीर्वाद लेने आये। सोनू और उनके बैंड ने इसके बाद अपने संगीत कार्यक्रम का प्रदर्शन किया जिसकी शुरुआत 'साई बाबा बोलो' भजन के साथ हुआ। भीड उनके धुनों को तालियों से साथ देने लगी, बाबा भी जिसमे शामिल हो गए, सभी को संगीत ने पुरे समय बांधे रखा।
गीतों के बीच, अभिभूत सोनू ने विनम्रतापूर्वक बाबा से कहा कि यह उनके सम्मुख पहला प्रदर्शन है और यदि उनसे कोई गलती हो जाये तो माफ़ करे। तीन गाने के बाद, उन्होंने बाबा से अपने प्रदर्शन को जारी रखने की अनुमति मांगी। बाबा ने कृपापूर्वक सहमति जताई, जिसके बाद सोनू ने अपने गीत 'ऐसी लगी लगन मीरा हो गयी मगन' से सबकी आत्माओं को छू लिया।
भगवान ने गायक को कार्यक्रम के अंत में एक सफेद हीरे की अंगूठी के साथ आशीर्वाद दिया।
भगवान ने लगभग 7:10 पर आरती स्वीकार किया और इन्दुलाल शाह जी के निवास के लिए प्रस्थान किया। भगवान बाद में 9:30 बजे धर्मक्षेत्र लौट आये।
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Oct 31, 2009 - प्रेममयी भगवान् का मुंबई में प्रेम पूर्वक स्वागत
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Oct 30, 2009 - भगवान पुणे में
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Oct 29, 2009 - एक सुनहरी शाम पांडुरंगा क्षेत्र में
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Oct 29, 2009 - भगवान ने श्री सत्य साई पांडुरंगा क्षेत्र का उद्घाटन किया
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अति प्रतीक्षित श्री सत्य साई पांडुरंगा क्षेत्र में तीन देवताओं, भगवान गणेश, भगवान विठ्ठला रकुमई और भगवान शिरडी साई बाबा की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा
शुभ अक्टूबर 29 की सुबह दिव्य हाथों से किया गया जिसमे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने भाग लिया।
इससे पहले सुबह में श्रद्धालुओं की भारी संख्या (जिसमे से कुछ अपनी पूजा से अंततः उत्तर मिल जाने की ख़ुशी में आँसू लिए अभिभूत थे!) पवित्र स्थल के मैदान
में फ़ैल गयी थी। पूरा वातावरण उत्साह से भरा था और उनके भक्तों में सुन्दर दर्शन तथा पिछली शाम के संगीत गायन से लगातार वही भावः बना हुआ था।
शानदार गुलाबी और सफेद में रंगे गणेश मंदिर के द्वार को सुगंधित फूलों, फूलों से बने स्वस्तिक और पातकों से सजाया गया था। मंदिर जाने वाले मार्ग में गुलाब की
नरम पंखुड़ियों को बिखेरा गया था। मंदिर के द्वार के ठीक सामने 'श्री' की पुष्प सजावट भगवान का स्वागत कर रही थी, जहां सजाया गए मंच पर, सभी बाधाओं
के विनाशक, भगवान गणेश की भव्य संगमरमर की मूर्ति रखी गई थी।
स्वामी के पहुंचने के ठीक पहले, याजकों और सेवादलों ने गणेश और विठ्ठला मंदिरों में कुंभ अभिषेक किया।
9:20 बजे, सोलापुर की बैंड पार्टी ने मंदिर तक लाल कालीन पर खड़े होकर परंपरागत मराठा शैली में भगवान का स्वागत किया। पूरा वातावरण वैदिक जापों
और वाद्ययंत्र की धुनों से लयबद्ध लग रही थी।
भगवान का आगमन 9:20 बजे पर वेदों, तुरहियों, झांझ और ड्रम की संयुक्त आवाज़ से विद्युतीकृत वातावरण में हुआ।
9:33 पर, भगवान अपनी कार से गणेश मंदिर गए जहाँ उन्होंने गणेश मुर्ती की स्थापना की।
इसके बाद भगवान विठ्ठला रुखुमाई मंदिर के लिए रवाना हुए। जैसे ही वे परिसर में प्रवेश किये, 9:45 पर भजन 'पाहि गजानना दीनावाना' के साथ शुरू हुआ।
भगवान शिरडी साई मंदिर गए जहाँ भजन 'साई राम घनश्याम भगवान तुम्हारा नाम' चल रहा था। यहाँ भगवान ने शिरडी बाबा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान
का आयोजन किया।
जैसे ही भगवान विठ्ठला मंदिर पहुचे, भक्तों ने पांडुरंगा भजन गाने लगे। फिर भगवान ने विठ्ठला मूर्ति के लिए प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया।
पांडुरंगा क्षेत्र, हडशी में हरे भरे पहाड़ियों से घिरा है, जो वास्तव में आनंद की घाटी में रूपांतरित हो गयी है! हडशी के निवासियों को इससे बड़ा आशीर्वाद, बड़ा उपहार नहीं मिल सकता है!
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Oct 28, 2009 - संगीतमय शाम ...
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भगवान के पुणे दौरे के पहले दिन, शाम श्रद्धालुओं की उत्सुक विचार के साथ भरा रहा - जिनमें से ज्यादातर 12 बजे से झुलसा देने वाले धूप में इंतजार करते रहे।
व्यवस्था पूर्ण थी। शाम की ताजी ताजी हवा और सूरज गोधूलि धूमिल रौशनी के साथ शाम हुई।
शाम के कार्यक्रम का शुभारम्भ श्री सत्य साई सेवा संगठन के भजन गायकों द्वारा गाये गये शहद की मिठास जैसी भजन के साथ शुरू हुआ। विनायक विनायक,
अंतरंग साई, मधुसुदना मुरलीधर, विठाला नारायण, अल्लाह हो तुम ईश्वर हो तुम, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, प्यारे नंदलाल दर्शन दीजो, हरि आनंदमय जया नारायण
इन भजनों ने भक्तों में जीवन का संचार किया।
जब भगवान 6:09 पर आये, 'स्वागतम, शुभ स्वागतम' के स्वर में आई तेजी श्रद्धालुओं के सरासर खुशी को प्रकट करने के लिए पर्याप्त थी। इसके बाद स्वामी की
अनुमति से हडशी के 'श्री हरि भजन मंडल' ने ' तु पहा, आला विठ्ठला' और 'एक गाओ आम्ही विठोबाचे नाव' गीत गाये।
शाम के कलाकारों - पद्मश्री श्रीमती कविता सुब्रमण्यम, कुमारी सपना मुखर्जी, श्री नितिन मुकेश ने स्वामी से आशीर्वाद मांगा और भगवान ने उन्हें पाद नमस्कार
के साथ पुरस्कृत किया।
कु. सपना मुखर्जी ने स्वामी से अपने नए एल्बम 'साई कृष्णा' के लिए आशीर्वाद मांगा जिसमे श्री नितिन मुकेश और उन्होंने भजन गाया है।
शाम भगवान् और मनुष्य के स्थायी लौकिक बंधन के साथ एक परमानंद संगीत के साथ डूब गया। जब कविता की 'इश्वारम्मा तेरा साई', नितिन मुकेश की
"ज्योत से ज्योत", सपना मुखर्जी की "पायोजी मैंने ..." तथा अन्य गीतों से उठे भावः ने आत्मा को स्पर्श कर लिया। स्वामी ने कविता सुब्रमण्यम के भावपूर्ण
गायन "साक्षात परब्रम्ह साई" को भजन के अंत में की सराहना की, उन्होंने श्लोक 'त्वमेव माता,पिता त्वमेव' का जाप श्री नितिन मुकेश के साथ किया।
भगवान को धन्यवाद देते हुए मन में उत्पन्न अपनी उन्मादपूर्ण ख़ुशी की भावना के लिए गायिका ने आभारी व्यक्त की। अनुभवी भक्त ने कहा "मुझसे यह मत पूछिये
की मै क्या महसूस कर रही हूँ.... मैं अभिभूत हूँ और बाबा की आभारी हूँ जिन्होंने मुझे गाने का मौका दिया और मै भाग्यशाली हूँ कि उनके सम्मुख मै एक पंक्ति
भी गा पाई '। पुराने ज़माने के महान गायक मुकेश के बेटे नितिन मुकेश ने कहा "संगीत परमेश्वर की भाषा है। बाबा संगीत के स्रोत है। मैंने पिछले साल अपनी माँ
को खो दिया और तब से मैं बहुत अकेला महसूस कर रहा हूँ, लेकिन आज मुझे लगता है कि मुझे ईश्वर मिल गये है"।
भगवान द्वारा कलाकारों को आशीर्वाद और बाद में सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का समापन भगवान को मंगला आरती पेश करके हुआ।
अनुशासन के बारे में बात करते हुए जो कि सत्य साई संबंधित गतिविधियों कि पहचान है, एक समर्पित स्वयंसेवक श्रीमती पाई ने कुछ दिलचस्प कहा "यह एक
चमत्कार ही है कि ऐसे विशाल सभा में, जिसमे मरीज, बच्चे और वृद्ध हैं ने कोई भी अनुशासनहीनता नहीं दिखाई। यही परमात्मा का सम्मोहन है"।
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Oct 28, 2009 - भगवान पुणे में - उनके आगमन की एक झलक ...
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28 अक्टूबर 2009 की सुबह कई उम्मीदों की सुबह, भगवान के पुणे स्थित श्री सत्य साई पांडुरंगा क्षेत्र, हडशी गांव में आने की निर्धारित तिथि, यह सबसे प्राचीन
उत्सुकता का क्षण जब ब्रह्मांड के स्वामी का भौतिक रूप में स्वागत किया जायेगा .... और उस समय हजारों की संख्या में पुरुषों और महिलाओं के महान भव्य आनन्द
का अवसर। हरे भरे लॉन में रंगीन शामियाने की सजावट। हर सृजन से मनोभाव जाना जा सकता था, प्रेम से भरी हवा, गती हुई पक्षियाँ और
रंगीन तितलियाँ सब भगवान की प्रतीक्षा में थे!
सर्व धर्म स्तूप को खूबसूरती से रंगीन फूल और रोशनी के साथ सजाया गया है, गणेश मंदिर के मुख्य द्वार को गोल्डन गेट के रूप में शानदार ढंग से खड़ा किया गया है।
महिलाएं परंपरागत गुलाबी और लाल रंग की "नवरी साड़ी" में सजकर गोल्डन गेट के बाहर कलश पूजा करने की तैयारी कर रही हैं। अपने ह्रदय में एक प्रार्थना के साथ,
ये महिलाये पांडुरंगा क्षेत्र के लिए सभी दिशाओं से अपने गांवों से आए हैं।
गणेश मंदिर के पीछे स्थित फव्वारा खुशी और उत्साह के साथ बह रहा था क्युकि भगवान वहां उनके बीच में थे। विट्ठल रकुमई और शिरडी साई बाबा के मंदिर के
प्रमुख गलियारे में रंगीन पगड़ी में पुरुष खड़े थे - इन्हें भगवान का स्वागत लजियम (पारम्परिक महाराष्ट्रियन नृत्य) ढोलकी के साथ करने के लिए करने के खडा
कराया गया था। जब प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ विट्ठल रकुमई मंदिर के यज्ञ मंडप में चल रहा था तुकाराम के गीत बाहर के वातावरण में फ़ैल रहे थे।
एक जोशीले और प्यार से भरे स्वागत भगवान की प्रतीक्षा में था जब भगवान् पुणे हवाई अड्डे पर 10 बजे विमान से पांडुरंगा क्षेत्र की ओर निकले। श्री जाधव और
उनके परिवार के सदस्यों, महाराष्ट्र के स्टेट प्रेजिडेंट श्री रमेश सावंत के साथ भगवान के आगमन पर उन्हें कृतज्ञता व्यक्त की। भगवान के मिशन के युवा राजदूतों,
बाल विकास के बच्चों ने महाराष्ट्रियन रंगीन कपड़े में सज कर सभी का स्वागत किया। हवाई अड्डे पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री, श्री शिवराज
पाटिल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, श्री अशोक चव्हाण ने भगवान का स्वागत किया दोनों ही लंबे समय से भगवान के भक्तों में शामिल हैं।
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Oct 28, 2009 - भगवान के महाराष्ट्र प्रवास का शुभारम्भ
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कई दिनों से इंतजार किये जा रहे दिन की सुबह आ ही गई। जहाँ मन थोडा निराश था कि भगवान के प्राकृतिक सौंदर्य चमत्कार के दर्शन कुछ दिन तक नहीं हो पाएंगे
लेकिन मन उत्साहित भी था क्युकी स्वामी एक सप्ताह के लिए पुणे के नजदीक हडशी स्थित श्री सत्य साई पांडुरंगा क्षेत्र में रहेंगे जो शाररिक रूप में भगवान का नवीनतम निवास है।
28 अक्टूबर की सुबह प्रशांति खुद को अपने प्रिय भगवान के विदाई के लिए स्थापित करने में जुटा था। भक्त स्वामी के सर्वोत्तम संभव दर्शन के लिए कई सुविधाजनक स्थानों पर बिखरे थे,
कई मंदिर में, कुछ तीन किलोमीटर श्री सत्य साई हवाई अड्डे के प्रमुख मार्ग पर, कुछ हवाई अड्डे के आसपास में, सभी का लक्ष्य उड़ान रथ की एक झलक पाना था।
जेट एयरवेज के जेट विमान बोइंग 737-700 में भगवान के साथ उनकी "50 के समूह" और चालक दल ने 8:30 बजे पर श्री सत्य साई हवाई अड्डे से 70 मिनट की दिव्य उड़ान भरी।
पुणे से प्राप्त समाचार के अनुसार भगवान का विमान 9:40 पर पुणे हवाई अड्डे पर उतरा जहाँ भारत के पूर्व गृह मंत्री और अनन्य भक्त श्री शिवराज पाटिल और महाराष्ट्र के
मुख्यमंत्री श्री अशोक चव्हाण ने भगवान का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
जहाँ भगवान सीधे पुणे में जाधव के निवास गए वहीँ "50 का समूह" हडशी के सुरम्य स्थान पर स्वामी के स्वागत के लिए निकल पड़ा।
भगवान का कार्यक्रम के अनुसार 11:30 पर श्री सत्य साई पांडुरंगा क्षेत्र पहुचेंगे और दोपहर 12:00 में नए मंदिर के उद्घाटन करेंगे।
इससे पहले, भगवान 8:00 श्री सत्य साई हवाई अड्डे के लिए रवाना होने के पहले साई कुलवंत हॉल में इकठ्ठा हुए भक्तों की भीड़ को आशीर्वाद दिए और मंगल
आरती ग्रहण किये। हवाई अड्डे पर भगवान ने हवाई अड्डे के निदेशक कैप्टन शर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों द्वारा पूर्ण कुम्भ प्राप्त किया। हवाई अड्डे पहुंचने पर,
भगवान ने हनुमान की एक नव स्थापित प्रतिमा का अनावरण बटन का उपयोग करके किया। भगवान के साथ पच्चीस छात्रों का दल जिसमे वर्तमान छात्रों के अलावा
विभिन्न संस्थानों जैसे आश्रम, श्री सत्य साई विश्वविद्यालय, श्री सत्य साई केंद्रीय ट्रस्ट और श्री सत्य साई साधना ट्रस्ट और वरिष्ठ भक्तों प्रो. जी. वेंकटरमण,
श्री एस. वि. गिरी, प्रो अनिल कुमार और परिवार के सदस्य थे।
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