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आश्चर्यजनक अनुग्रह
सुश्री नूशिन मेहरबानी के द्वारा
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सुश्री नूशिन मेहरबानी का जन्म ईरान में हुआ, उन्होंने ईरान के राष्ट्रीय रेडियो और टेलीविजन के लिए एक पत्रकार के रूप में काम किया। आगे चलकर लॉस एंजिल्स, अमरीका में एक ईरानी टी वी स्टेशन से अपने कैरियर को जारी रखा। 1991 जब वह पहली बार साई बाबा के बारे में सुनी,तब से वह अनेक बार भारत के लिए कई यात्राएं कर चुकी है और भगवान के साथ बातचीत के कई मौके से धन्य हुई है। वह अब पुत्तापर्थी में रहती है।
केवल प्रशांति निलयम, ऐसी आध्यात्मिक भूमि में जहां सभी धर्मों का विकास आज़ादी से करते हैं जब दुनिया भर के ईसाई भगवान के पुत्र के आने का जश्न मन रहे थे, क्या एक ईरानी मुस्लिम भक्त को ऐसी ऐसी साफ़ सुथरी ख़ुशी का अनुभव हों पाया ? नूशिन भगवान से मिले दिव्य प्रेम और अनुग्रह को याद करती है जो उसे 2007 के क्रिसमस के दौरान भगवान श्री सत्य साई बाबा के निवास पर एक साधारण सेवा के दौरान मिला, जो आने वाले समय के लिए आनंदमय यादें हैं और जिन्हें वे संजो कर रखी है।
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स्वामी के घर के बगल में सजावट |
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सोलह वर्षो के भारत की यात्रा और प्रशांति निलयम में कई समारोहों में भाग लेने के बाद, क्रिसमस के पवित्र अवसर पर मुझे पहली बार आश्रम रहने का मौका मिला, पिछले ही वर्ष(2007) में प्रकाश और प्रेम के प्रभु, प्यारे यीशु के जन्मदिन पर। मैंने अपने एक दोस्त के माध्यम से सजावट के बारे में सिखा।
मैं खुश थी की मै सजावट समिति में शामिल होने में सक्षम थी। शुरुआत में, हम सिर्फ एक मुट्ठी भर लोग थे जो एक छोटे से आश्रम के कमरे में काम रहे थे। एक अन्य महिला और मैंने आश्रम के आसपास के द्वार पर लटके पर्दे की सिलाई का कार्य शुरू किया। धीरे धीरे अन्य लोगों से काम का दायरा बढ़ता गया। दो सप्ताह तक, मैंने इटली की एक महिला के साथ के निकटता पूर्ण काम किया। हम एक दूसरे की भाषा नहीं जानते थे, लेकिन हम एक दूसरे को अच्छी तरह समझ गए। हमारी आम भाषा में एक आपसी सम्मान, दयालुता, धैर्य और प्यार था।
हालांकि मैं एक मुसलमान के रूप में बढ़ी हुई थी, लेकिन मैं अमेरिका और कनाडा में कई वर्षों तक रही और मुझे क्रिसमस के विभिन्न प्रकारों से मनाये जाने वाले समारोह में भाग लेने का अवसर मिला। इस साई समुदाय के बाहर, क्रिसमस की छुट्टियाँ मेरे लिए अधिकतर उपहार,पार्टी, खाना और पीने तक ही थी। साई सेंटर समारोह में पहली बार मुझे प्यार और शांति की भावना महसूस हुई जो यीशु सिखाने आये थे। बाबा की उपस्थिति में क्रिसमस का यह पावन पर्व जिसकी पवित्रता और भाईचारे की तुलना मैं विश्व में किसी से भी नहीं कर सकती।
समर्पित सजाने वाले
सजावट समिति में हम सभी का एक ही लक्ष्य था। हम प्रार्थना कर रहे थे कि इस सजावट के माध्यम से हम भगवान साई से अपने प्यार को व्यक्त कर सके जो यीशु, अल्लाह, मूसा या बुद्ध से अलग नहीं है। हमारे प्रेम रूपी श्रम की शुरुआत राउंड हाउस 3 से हुई और शेड 32 पर समाप्त हुई। जैसे जैसे हमारे काम का विस्तार होते गया, विभिन्न धर्मों और राष्ट्रीयता के लोग आये और हमसे जुड़ने लगे। लेकिन मैं अकेली मुस्लिम और ईरानी थी जब तक बोस्निया से दो महिलाए नहीं पहुंची थी।
इटालियंस ने मेरा इस तरह का नाम कभी नहीं सुना था उनके लिए मेरा नाम याद रखना मुश्किल था। अंत में वे मुझसे उसका मतलब पूछने लगे, और मैंने कहा "स्वीट "; इससे उन्हें खुशी हुई और मुझे "डॉल्स" बुलाने लगे; जिसका अर्थ इटालियन भाषा में "स्वीट" होता है। यह मेरे लिए अच्छा था। सभी के नाम केवल उनके शरीर की पहचान है और सच्ची आत्मा से उनका कोई लेना देना नहीं होता है।
“साई राम” और एक बड़ी मुस्कान हमारी आम भाषा थी। हम अपने ह्रदय के खामोशी में, राष्ट्रीयता, धर्म, रंग और भाषा के अंतर से परे स्वामी के शिक्षाओं के अभ्यास में लगे थे। हम सभी का यह सर्वश्रेष्ठ प्रयास था, हम स्वामी को खुश करना चाहते थे और पता नहीं कैसे हम सभी परमेश्वर के आम धागे पर एक सुन्दर मोती की तरह पिरोते जा रहे थे।
एक दिन, जब जन्म के दृश्य की तैयारी की जा रही थी, बालक यीशु गायब हो गए। प्रभारी व्यक्ति जो कमरे के आसपास घूम रहा था, वह लोगों से पुछ रहा था कि " क्या तुमने बाल यीशु को देखा है?"; जब वह मेरे पास आये , मैंने बिना कुछ सोचे , मेरी आत्मा की गहराई से कहा, "हाँ, मैंने बाल यीशु को देखा है 2000 साल पहले."; तभी मुझे कुछ साल पहले देखा सपना याद आने लगा। स्वामी एक क्रिसमस नाटक को निर्देशित कर रहे थे। मैं इस इन्तेज़ार में बैठी हुई थी की मुझे भी नाटक के किसी हिस्से में भाग लेने का अवसर मिले। अंत में उन्होंने मुझे बुलाया और कहा, "आपको तीन बुद्धिमान व्यक्तियों में से एक की भूमिका निभानी है"; मैंने कहा, "स्वामी, क्या यह भूमिका अन्य की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है?"; (यह मेरा अहम बोल रहा था) स्वामी ने जवाब दिए, "नहीं;"। मुझे अहसास हुआ कि हमारे जीवन में हम जो भी भूमिका निभाते हैं उन सभी का भगवान के समक्ष बराबर का महत्व होता है"।
एक बहुत ही विशेष कर्तव्य
तब हमारी भूमिका का प्रशांति क्रिसमस उत्सव में सबसे रोमांचक भाग आया। यह समय जब हमें स्वामी के घर के बाहर सजावट शुरू करना था। 8:30 शाम में, हम मुख्य द्वार से स्वामी के घर में प्रवेश किये।
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यजुर मंदिर को बहुत प्यारी सजावट |
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पूर्णचंद्र हाल की छत को सजाना |
हम फुसफुसाते हुए शांति से चल रहे थे ताकि हमारे प्रिय स्वामी को कोई परेशानी नहीं हो। कुछ सेकंड के लिए मैं एक कोने में खड़े हो कर आकाश में, चाँद और सितारों को देखने लगी और फिर अपने सभी सहयोगियों को जिनकी उम्र 17 से 75 के बीच होगी। मुझे लगा कि हम उस दिव्य ऊर्जा और उल्लास से भरी हुए स्वर्ग में सभी बच्चों थे। हम दो रातों के लिए स्वामी के घर के दरवाजे के अंदर काम कर रहे थे, जो हमारे भगवान के लिए एक सुंदर भेंट थी। मैं स्वामी से प्रार्थना कर रही थी कि इस प्रेम से भरे कार्य को स्वीकृति और स्वीकार करें। जब वह दर्शन के लिए आए, उन्होंने हॉल के चारों ओर देखे, उन्होंने हमारे काम की प्रशंसा की जिसमें एक विशेष प्यार महसूस हुआ।
सजावट समिति को करीब से स्वामी के दर्शन करने का विशेषाधिकार दिया गया। हमे आँख से आँख मिलाकर स्वामी का आर्शीवाद प्राप्त हुआ। यह मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा था। उस समय मैंने खुद को याद दिलाया की वे ही इस खेल के निर्देशक है यदि कोई प्रशिध्दी के योग्य है तो यह वही हैं। वह ही है जो सबके ह्रदय में रहते है और कार्य करते है।
क्रिसमस के कुछ दिन बाद, मेरे सजावट समिति के समन्वयक का फ़ोन आया। उन्होंने कहा कि स्वामी ने अगले सुबह के भजन के बाद हमें सजावट को हटाने की अनुमति दी है। हमारे पास हॉल खाली करने के लिए दो से ढाई घंटे थे ताकि सेवा दल दोपहर दर्शन के लिए हॉल तैयार कर सके। हम धन्य है, बहुत से लोगों ने सब कुछ निकालने और वापस शेड में रखने में मदद की।
स्थायी खुशबु
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इस साई कुलवंत हॉल में शानदार ढंग से सजाया हुआ मंच |
मैंने बरामदा में, शेर के निकट स्थित दो स्तंभों के पास से सजावट को निकालने का काम किया। मैंने पाया कि कुछ गोंद स्तंभों में चिपक गया जिससे स्तंभों का रंग निकल गया था जिसके लिए हमें पेंट दिया गया था। जिसमें गंध थी और यह गंध इतनी तेज थी कि साबुन से धोने के बाद भी बनी रही। मैं सोच रही थी कैसे हम इस गंध से छुटकारा पाऊ? आर्श्चय, स्वामी कुछ ही घंटों में आने वाले थे, मुझे एक हल नज़र आया। मैं गाँव में बाहर गई और दो बोतलें गुलाब जल की खरीद कर पहुँच गई।
लगभग उस समय तक सभी लोग जा चुके थे। मैंने एक नया कपडा लेकर गुलाब जल से स्तंभों की धुलाई करना शुरू कर दी। वहाँ से मैं शेर पर जमी धूल को दूर करने चली गई। मुझे गुलाब जल से गणेशा के पैर धोने का भी अवसर मिल गया और इसी के साथ मैंने सोचा, क्यों न मै बरामदा में अन्य देवताओं को भी साफ करू? मैंने सोने की सीढियों जहाँ स्वामी खड़े होते हैं सहित पूरा बरामदा साफ करते हुए काम ख़त्म किया। मैंने सभी स्थानों को अपने स्कार्फ से सुखा दिया।
इस समय के दौरान सेवा दल स्वयंसेवक फर्श पोछ कर हॉल तैयार कर दिए। मुझे मेरे काम के साथ अकेली छोड़ गए। मै काम में मग्न थी और मन ही मन चुपचाप स्वामी से बात करने लगी, जो मुझे यह कई जन्मों का अद्भुत अनुग्रह उनसे प्राप्त हुआ उसके लिए मेरे दिल से धन्यवाद निकला, मैंने यह महसूस किया कि मै धन्य हूँ जो मुझे इस सेवा कार्य का हिस्सा बनने का अवसर मिला। मैं खुश हूँ की मुझे क्रिसमस की वास्तविक भावना का अनुभव मिला। बाहरी सजावट केवल एक साधन था जिसका उपयोग कर स्वामी हम सबको पवित्र दिवस के आंतरिक अर्थ को समझने में मदद कर रहे थे। हम सब दिल की गहराई से भगवान की छत के नीचे प्रेम के साथ और भाईचारे से भाइयों और बहनों की तरह काम करने में सक्षम थे।
- साई स्मृति टीम
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