सुश्री मालिने गदेपल्ली का जन्म कोलकाता भारत में हुआ था। वह अमेरिका कैलिफोर्निया लोस एंजेलेस में रही । वह स्वामी के स्कूल प्रशांति निलयम में कक्षा 9 वी में शामिल हुई। उन्होंने स्नातक की उपाधि सन् 1991 में श्री सत्य साई विश्वविद्यालय जिला अनंतपुर परिसर से अंग्रेजी साहित्य में प्राप्त की । विवाह के बाद मालिनी एक और डिग्री लिबरल अध्ययन में शिक्षण प्रलेखन प्राप्त करने चली गयी । वर्तमान में वह कैलिफोर्निया पब्लिक स्कूल प्रणाली में वर्ग -3 शिक्षक के रूप में कार्यरत है।
वह कैलिफोर्निया सेंट्रल सन जोस में श्री सत्य साई केन्द्र की सक्रीय सदस्य है जहाँ वे 15 वर्ष से SSE सिखा रही है । वह एक प्रेरक वक्ता है । और वह अमेरिका कनाडा यूरोप और भारत के विभिन्न भागो में साई बैठकों में एक वक्ता के रूप में शामिल है ।
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भगवान श्री सत्य साई बाबा का प्रेम मेरे जीवन के लिए दिव्य मार्गदर्शक और प्रेरणा है। उन्होंने मुझे और मेरे परिवार को सबसे अधिक प्रभावित किए है । जिसका वर्णन कर उन्होंने कई बार अपना अविश्वसनीय प्यार दिखाया है । यह अनुच्छेद मेरी ज़िंदगी में स्वामी के दिव्य प्रेम और उनकी प्रेरणादायक सर्व व्यापकता को छोटे उदाहरणों से चित्रित करने के लिए एक विनम्र प्रयास है।
उनकी छात्र होने का आधिकार मुझे 1984 में दान में मिला जब मैं श्री सत्य साई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, प्रशांति निलयम में शामिल हुई । तब तक मै कैलिफोर्निया लोस एंजेलेस में बाल विकास छात्रा के रूप में बड़ी हुई । तब मुझे स्वामी एक बच्चे के रूप में जानते थे । मै बहुत उत्साहित थी की मै भगवन के इतने करीब थी। मैं सात साल स्वामी के स्कूल और कॉलेज में रही । स्वामी का आना उनसे मेरी मुलाकात का अनुभव निस्संदेह मेरी स्मृति में आज भी है।
कोई भी विषय दिव्य अनुभव के समक्ष छोटा नही होता
जब मैं उच्चतर माध्यमिक शाला में पढ़ रही थी तब स्वामी मेरी कक्षा में घूम रहे थे । उन्होंने किताबों के ढेर की ओर इशारा करते हुए मेरी एक सहपाठी से पूछे "यह सभी पाठ्यपुस्तक है?",वो कहती है ,"नही स्वामी ,पाठ्यपुस्तक और नोटबुक है" । तब स्वामी उसका सर हिलाते हुए बोले ,"जितने अधिक किताबे ,उतने अधिक विचार" ।
हम बहुत खुश थे क्युकि हमारे पास पढने के लिए 10 विषय थे और यह हुआ कि हमारे शिक्षकों ने दिव्य शब्दों से तत्काल सोचा कि किसी तरह हमारी शैक्षणिक भार को कम कराया जाए । कुछ हफ्तों बाद में युवा किशोरों की ओर से पाठ्यक्रम के इच्छित सोच से एकदम नया डेस्क दिए गए । जिसमें हमारी सभी पुस्तकों को रखने के लिए एक जगह दी गई । प्रभु ने भी इस तरह सांसारिक विवरण में अपनी सावधानी और दया दिखाई ।
भगवान साई के हर कार्य जीवन में सबक है
एक और बार, स्वामी नाश्ते के बाद हमारे स्कूल का दौरा करने आए और जब हम सभी फोयर में इकट्ठे थे । स्वामी रसोइया चाची से पूछते है की हम लोगो ने नाश्ते में क्या खाए । वह प्लेट में इडली, संभार, दलिया, अंकुरित चना और चटनी लाई । स्वामी ने अंकुरित चना की ओर इशारा करते हुए पूछे ,"यह क्या है" ,उसने कहा ,"स्वामी यह अंकुरित चना है " । उन्होंने थोड़ा उनके मुह में डाला और वह मुह बनाते हुए चबाने लगी । हम यह देख बहुत खुश थे की स्वामी ने उन्हें वो चना खिलाये क्योकि हम में से किसी को भी अंकुरित चना पसंद नही था ।
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इससे हमने सीखा ली ,कि भले ही कोई चीज हमें अच्छी न लगे लेकिन उसे हमें मुस्कुराते हुए लेना चाहिए । क्योकि लंबे समय के बाद वह हमारे लिए अच्छा होता है । जीवन का आर्शीवाद चीनी लेपित हो यह ज़रूरी नही कभी कभी यह कड़वी और मज़ेदार भी होती है । जो हमारे आध्यात्मिक स्वास्थ के लिए अच्छी होती है । |
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फिर वे रसोइया चाची की तरफ़ मुडे और उनसे पूछे ,"इन्हे आप यह कितनी मात्र में देती है ?" उसने कहा ,"एक चम्मच स्वामी " । तो स्वामी ने कहा ,"अब चलो उन्हें दो चम्मच भर कर दो " और उन्होंने हम सबको एक बहुत मीठी मुस्कान दी ।
इससे हमने सीखा ली ,कि भले ही कोई चीज हमें अच्छी न लगे लेकिन उसे हमें मुस्कुराते हुए लेना चाहिए,क्योकि लंबे समय के बाद वह हमारे लिए अच्छा होता है । जीवन का आर्शीवाद चीनी लेपित हो यह ज़रूरी नही कभी कभी यह कड़वी और मज़ेदार भी होती है । जो हमारे आध्यात्मिक स्वास्थ के लिए अच्छी होती है ।
साई - देखभाल करने वाले पालक
मेरी 10 वीं कक्षा के दौरान, हमारे स्कूल में एक छोटी चेचक महामारी फैली थी । जब मेरी दसवी बोर्ड परीक्षा के कुछ ही हफ्ते बचे थे । मेरा भाई इस बीमारी की चपेट में आ गया । चेचक से पुरे शरीर में (गले के अन्दर तक ) दर्द से असुविधा होने लगी। जो स्वामी के दिए उपचार से कम हो गया । उन्होंने शिक्षक से कहे की वे नीम की पत्तियों की गोलिया बनाये और हवा को शुद्ध करने के लिए सम्ब्रानी या विशेष प्रकार से धुप का उपयोग करें ताकि हमारे गले में अधिक दर्द न हो । और हम सभी के कल्याण के लिए वो हर दिन समय पर पूछताछ तब तक करते रहे जब तक कण्ठमाला का रोग ठीक न हो गया । उसके बाद प्रशांति निलयम स्कूल परिसर से कुछ दूरी पर एक कमरे की व्यवस्था की गई ताकि इस बीमारी के फैलने से को रोका जा सके ।
उनका आनिश्चिता भरा प्यार
हमारी कक्षा दसवी बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। इस महत्वपूर्ण घटना के लिए हम स्वामी से आशीर्वाद के लिए प्रार्थना कर रहे थे । उन्होंने कहा की उनका आशीर्वाद सदा हमारे साथ है लेकिन उन्होंने हमें अपना पादनमस्कार (पैर छूकर आशीर्वाद )नही दिए ।
निराश लेकिन खुश थे की उन्होंने हमें अपना दर्शन स्वीकार किए हम भजन के बाद वापस स्कूल चल दिये । अगले दिन जब हमारे शिक्षक दर्शन के लिए गए थे कोई आए और हमें बताये की स्वामी हमें बुला रहे है!
हम उत्तेजना में आंधी की तरह तेज भागते हाफ्ते हुए एक पंक्ति में भगवान के लिए एक पंक्ति में बैठ गए । स्वामी अपने हाथ में कुछ लेकर मुस्कुराते हुए आए । उन्होंने हमें देखे और कहे “परीक्षा हॉल में दो पेन लेकर जायेंगे एक पेन की स्याही ख़तम होने पर दूसरी पेन हो ।”
दिव्य माता ने हम पर अनुकम्पा करते हुए हमें पेन सेट देने को कहा । उन्होंने हम में से प्रत्येक को आशीर्वाद दिया साथ ही साथ परीक्षा हॉल टिकट को भी ।
स्वप्न में आत्मविश्वास की प्रेरणा
जहाँ तक मेरा सवाल था दसवी बोर्ड परीक्षा मेरे लिए एक बुरा सपना था । संयुक्त राज्य अमेरिका जहाँ निचली कक्षा में कोई परीक्षा नही दी वहां फाइनल की पुरी अवधारणा मेरे लिए नई थी । मैं विशेष रूप से संस्कृत से डरती थी । उसकी पटकथा इतनी अजीब थी, और मेरे में याद करने की प्राकृतिक प्रतिभा नही थी । स्वामी तो हमारे अंतरमन विचारो और भावनाओ से अवगत है । वह जानते थे की मुझे संस्कृत की परीक्षा से कितना डर था ।
परीक्षा से पहली रात को वह मेरे सपने में आए और मुझे पुरा प्रश्न पत्र दिखाए! कहना आवश्यक नही, संस्कृत भाषा में मेरी समझ कम थी पेपर देखकर भी परीक्षा में मेरी कोई मदद नही हुई । फ़िर भी यह मेरा आत्मविश्वास है की मै परीक्षा में किसी तरह पास हो गई । मुझे यकीन था कि यदि भगवान ने मेरे डर को दूर करने के लिए मुसीबत लिया है तो मुझे अपने व्यक्तिगत अक्षमता के लिए साहसी होना चाहिए । उनके अनुग्रह के साथ ही मैंने अपनी परीक्षा उत्तीर्ण की ।
साई का आशीर्वाद उनके छात्रों के लिए हर जगह है
दसवी के बाद प्राईमरी स्कूल से स्नातक करने के लिए मेरी बैच अंतिम थी । मेरे छोड़ने के बाद 11 व 12 ग्रेड पुत्तापर्थी में स्थापित किया गया जो लड़कियों के लिए भी था । अनन्तपुर जिला में जाने से स्वामी की तत्काल शारीरिक उपस्थिति छोड़ने का दुख कम हो गया जब उन्होंने शैक्षिक वर्ष के शुरुवात में पादनमस्कार दिये और कहा , “कही भी रहो मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है.”
नारीत्व का वरदान
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लेखक दिव्य कुलाधिपति से एक पुरस्कार से सम्मानित हुए |
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अनंतपुर जिले के 5 साल अब तक प्राणपोषक चुनौती दे रहे थे । एक वर्ष में स्वामी छात्रावास में २-३ bar आए थे यहाँ उनके साथ बैठ कर भोजन करना सचमुच स्वर्ग की तरह प्रतीत हो रहा था और उन्होंने महिलाओ के लिए एक दिव्य प्रवचन सुनाये जो यादो में बस गए ।
उन्होंने बताया कैसे हमें अपने कमरे को साफ लरना चाहिए (कोनों सहित) । कपड़े बड़े करीने से ज़माने चाहिए और ये कि अच्छी तरह से अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा महिलाओं के लिए माँ बनना सबसे बड़ा आशीर्वाद है और वास्तव में यही प्राथमिक और शक्तिशाली कारन है महिला के रूप में जन्म लेना !मेरी लिए यह एक शक्तिशाली कथन था ।
वे अतीत वर्तमान और भविष्य देखते है
जब मुझे स्नातक की उपाधि मिली और मै इस पुत्तापर्थी से जा रही थी तब मेरे शब्दों को एक नया आयाम मिल गया । नवम्बर 1991 में मेरे दीक्षांत समारोह के बाद मै और मेरी माँ पुत्तापर्थी से घर लौट रहे थे मुझे उस दिन जाना था मै सब के साथ लाइनों में बैठ गई तब स्वामी बाहर आए , मैंने धीरे से कहा “मै और अम्मा जा रहे है ।” स्वामी मेरी तरफ़ देखे और बहुत मीठे शब्दों में बोले “जाओ और वापस आना ।” और कुछ कदम चलने के बाद वे वापस मुडे और मेरी आँखों में गहराई से देखते हुए बोले “कनाडा?”
मैंने सुन्न होकर सर हिला दीया और अपने आप सोचने लगी कि मै कभी कनाडा गई ही नही । हम अमेरिका में रहते थे जो उत्तरी अमेरिका महादीप में है । वे फिर मेरी आँखों में गहराई से देख रहे और अपने हाथ हिलाते हुए विभूति सृजन करके मेरी हाथ में विभूति डाल दिये और उनकी उँगलियों को मेरे चेहरे पे छिड़क दिया । मै अचंभित लेकिन बहुत खुश थी मुझे उनसे इतना अनुग्रह प्राप्त हुआ कि मै सोच भी नही सकती इसे शब्दों में कैसे बयान करू ।
ढाई साल बाद, मै अपने पति के साथ एक बिज़नस ट्रिप पर कनाडा गई । दिन के अंत में हम बहुत थके हुए थे । भूख भी लग रही थी हम होटल की तरफ़ बढ़ रहे थे । मेरे पति गाड़ी चला रहा था और वह अचानक यह एहसास हुआ की सड़क से बाहर निकलने की जगह पीछे छुट गई है । जैसे ही उन्होंने जल्दी से रास्ता बदलने की कोशिश की हमें पीछे से वक वहां द्वारा जोरदार टक्कर मारी गई और मै “साई राम ,साई राम” चिल्लाने लगी ।
हमारी गाड़ी झुकने लगी , और हम रेलिंग के ऊपर चढ़ने लगे । जिस कार ने हमें ठोकर मारी उसके ड्राइवर ने देखा की क्या हो रहा है और वास्तव में हमें ऊपर से जाने से रोकने के लिए फिर से टक्कर मारी । उस समय अहसास भी नही था की दूसरी तरफ़ नदी है दोनों वाहन एक जोरदार आवाज के साथ रुक गए ।
आश्चर्यजनक रूप से कोई भी घायल नही हुआ था । जब हम इस बात कर रहे थे एक दुसरे को जानकारी दे रहे थे तभी एक बहुत अच्छी तरह से तैयार चौकीदार हमारे पास आया । उसने सूट और टोपी पहना था और उसके जेब से बाहर एक घड़ी लटक रही थी । उसने पूछा "आप सब ठीक है ", हमने कहा कि हम सब ठीक हैं । और दुबारा हम क्षतिग्रस्त हो गए वाहनों की जाँच में लग गए ।
जब हमने फिर से चौकीदार को देखा वह गायब हो चुका था । वास्तव में, वहाँ आसपास कोई कार नही थी और अधेरे में ना ही वाहन गुजर रहे थे । मुझे बाद में यह एहसास हो गया कि वह चौकीदार स्वयं स्वामी के अलावा और कोई नही थे ,और यह भी कि दो साल पहले मेरे ऊपर छिड़की हुई विभूति ने ना केवल मेरी जान बचाई साथ ही मेरे पति कि और हमारे पीछे वाली गाड़ी के ड्राइवर की भी !
हर कठिन पल का साई से संरक्षण प्राप्त होता है
जब मै अपने जीवन के अनुभवों पर ध्यान देती हूँ, अपने दो प्रियजनों को खोने से लेकर, एक चोर जिसने मेरे घर से मेरे सारे गहने ले गया, एक आग लगने की घटना जिसमे मेरे जवान बेटे और बेटी की रक्षा हुई, साथ ही कई प्रकार के शाररिक, मानसिक और भावनात्मक कठनाई । मुझे पता है स्वामी हमेशा ध्यान रखते हैं । उन्होंने मेरी रक्षा की, मुझे मजबूत बनाया और मुझे निर्देशित किया । मै निराशा के समय और सबसे बुरे क्षणों में उनकी उपस्थिति महसूस करती हूँ । |
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जब मै अपने जीवन के अनुभवों पर ध्यान देती हूँ, अपने दो प्रियजनों को खोने से लेकर, एक चोर जिसने मेरे घर से मेरे सारे गहने ले गया, एक आग लगने की घटना जिसमे मेरे जवान बेटे और बेटी की रक्षा हुई, साथ ही कई प्रकार के शाररिक, मानसिक और भावनात्मक कठनाई । मुझे पता है स्वामी हमेशा ध्यान रखते हैं । उन्होंने मेरी रक्षा की, मुझे मजबूत बनाया और मुझे निर्देशित किया । मै निराशा के समय और सबसे बुरे क्षणों में उनकी उपस्थिति महसूस करती हूँ ।
जब मैं पुत्तापर्थी और अनंतपुर में पढ़ रही थी तब की उनकी ज्ञान की बातें, अनुभव जो हमें छात्र के रूप में मिला, और अनगिनत बार अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उसकी मौजूदगी का अहसास करना, केवल ये ही दोहराता है की हमारे प्रिय भगवान् हमेशा यहाँ मौजूद हैं । आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि वह यहाँ हम में से हर एक के लिए है चाहें हमारी पृष्ठभूमि जो भी हो । हमारे लिए उनका प्यार समान है ।
एक पृथ्वी पर और आकाश पर साई संदेश है: “सबसे प्रेम , सबकी सेवा”
हाल ही में जब मैं घर में काम कर रही थी, मैं स्वामी के शारीरक रूप को याद कर रही थी । जब मैंने आकाश में बादलो में उनके बालों की कल्पना कर यह सोच के मुस्कुराने लगी कि वो पृथ्वी पर अपने बच्चो को देख रहे है । मै आँखों में आंसू लिए स्वामी से प्रार्थना करने लगी कि उन्हें मुझसे क्या चाहिए, उनका ये बच्चा जीवन के इस स्तर पर करने को तैयार है । मैं एक माँ, एक स्कूल शिक्षक, और एक बाल विकास शिक्षक हूँ और मैं उनसे दुबारा आश्वासन चाहती हूँ कि मै वही कर रही हूँ जो वो चाहते हें ।
उनके साथ इस आंतरिक संवाद के दौरान जब मै दाहिने मुड़ने के पहले स्टॉप के निशान के पास रुकी तब अचानक मैंने देखा कि मेरे सामने कार के पीछे की खिड़की पर स्वामी की एक विशाल स्टीकर थी ! मैंने इससे पहले कभी ऐसा नही देखा था ! उनके इस मुस्कुराते हुए तस्वीर में आशीर्वाद के लिए हाथ उठाया है और यह कह रहे हें कि “सबसे प्रेम , सबकी सेवा” । आंसू मेरे चेहरे से नीचे बहने लगे ,मेरा दिल कृतज्ञता के साथ भगवान को धन्यवाद कहने लगा । एक बार फिर उनके मार्गदर्शन करने के लिए धन्यवाद दिया । उनका प्यार असीमित है । उसके बिना, जीवन व्यर्थ है । वो साथ है तो कुछ भी संभव है ।